आज का कुरुक्षेत्र
महाभारत का सजीव चित्रण करती हैं। जहाँ कृष्ण (विवेक) अनुपस्थित है और केवल स्वार्थ का खेल चल रहा है। फिल्म का शीर्षक: "आज का कुरुक्षेत्र" पात्र: * आर्यन (उम्र 25): जिज्ञासु, विद्रोही, जो व्यवस्था से दुखी है। (अर्जुन का आधुनिक रूप) * ठाकुर साहब (उम्र 55): चतुर, सत्ता का भूखा, जो शकुनि की तरह बिसात बिछाता है। * पंडित जी (उम्र 50): ज्ञानी लेकिन विवश, जो केवल शास्त्र जानता है, शस्त्र नहीं। दृश्य 1: एक पुराना खंडहर नुमा कमरा (रात का समय) (कमरे में एक पुरानी मेज पर ताश बिखरे हैं। धुएँ का गुबार है। ठाकुर साहब और पंडित जी बैठे हैं। आर्यन कमरे में दाखिल होता है, उसके चेहरे पर आक्रोश है।) आर्यन: (मेज पर हाथ मारकर) कब तक चलेगा यह तमाशा? मोहल्ले की जमीन बिक गई, लोगों के घर उजड़ गए और आप लोग यहाँ दांव लगा रहे हैं? ठाकुर साहब: (मुस्कुराते हुए) बैठो बेटा। राजनीति और जुए में फर्क नहीं होता। हार-जीत तो चलती रहती है। आर्यन: (गुस्से में) कौन हार रहा है? और कौन जीत रहा है? कौरव कौन? कौन पांडव? मुझे तो सब एक जैसे नजर आ रहे हैं। पंडित जी: (ठंडी आह भरकर) टेढ़ा सवाल है, बेटा। आज के ...