आज का कुरुक्षेत्र - अध्याय 4
**अंतिम अध्याय (The Grand Finale)** है। यह भाग किसी को 'नायक' या 'खलनायक' बताने के बजाय, पूरे समाज के आईने को दर्शकों के सामने रख देता है। ## **फिल्म का शीर्षक: "आज का कुरुक्षेत्र - अध्याय 4: सत्य ही महाभारत है"** **पात्र:** आर्यन, ठाकुर साहब, पंडित जी। **स्थान:** खंडहर का कमरा। अब सूरज पूरी तरह निकल चुका है, लेकिन कमरे के भीतर अब भी लंबी परछाइयां बन रही हैं। ### **दृश्य 1: चेहरों से नकाब उतरना** *(ठाकुर साहब नक्शे के फटे टुकड़ों को देख रहे हैं। पंडित जी मौन हैं। आर्यन कमरे के बीचों-बीच खड़ा है। माहौल में एक भारीपन है।)* **आर्यन:** (धीमी लेकिन गहरी आवाज में) हम अब तक दूसरों में दुश्मन ढूंढ रहे थे। पर सच तो यह है कि **महाभारत कथा नहीं, सत्य है हमारे समय का।** यह हर उस दौर का सच है जहाँ **मूल्यहीनता और अवसरवाद** जीवन के मानदंड बन जाते हैं। **ठाकुर साहब:** (चिढ़कर) तुम मुझे दोष दे रहे हो? मैंने सिर्फ वही किया जो इस 'सिस्टम' में रहने के लिए जरूरी है। **आर्यन:** यही तो कुरुक्षेत्र की पृष्ठभूमि है, ठाकुर साहब। **जब बंद हो धृतराष्ट्र की आंखें न्या...