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आज का कुरुक्षेत्र - अध्याय 2

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**दूसरा अध्याय (Chapter 2)** है। पिछले भाग में हमने व्यवस्था के प्रति आक्रोश देखा था, इस भाग में हम उन गहराइयों में उतरेंगे जहाँ भावनाओं और तर्क का टकराव होता है। ## **फिल्म का शीर्षक: "आज का कुरुक्षेत्र - अध्याय 2: भीष्म का मौन"** **पात्र:** वही तीन (आर्यन, ठाकुर साहब, और पंडित जी) **स्थान:** वही खंडहर नुमा कमरा, लेकिन अब बाहर बारिश हो रही है और बिजली कड़क रही है। ### **दृश्य 1: कमरे के भीतर (रात का समय)** *(कमरे में सन्नाटा है। ठाकुर साहब एक महंगी शराब का गिलास पकड़े खिड़की से बाहर देख रहे हैं। पंडित जी एक पुरानी पोथी पढ़ रहे हैं। आर्यन गीले कपड़ों में अंदर आता है, वह काफी भावुक और थका हुआ दिख रहा है।)* **आर्यन:** (धीमी आवाज में) आज उस गरीब विधवा का घर ढहा दिया गया। उसके बच्चे सड़क पर रो रहे थे। कोई आगे नहीं आया... सब तमाशबीन थे। आखिर क्यों? **पंडित जी:** (पोथी बंद करते हुए) बेटा, शास्त्र कहते हैं कि जब पाप का घड़ा भरता है, तो विनाश निश्चित होता है। **आर्यन:** (चिल्लाकर) शास्त्र! हमेशा शास्त्र! पंडित जी, उन बच्चों की भूख का तर्क किस शास्त्र में है? **टेढ़ा सवाल है...