यात्रा ०२.०७.२०२४

"काल" सबकी अपनी गति हैं उसी गति को आज की भाषा में समय कहते हैं, आज से लगभग १०००० वर्ष पहले काल गति माने की समय की गति का वर्णन हमे भारतीय संस्कृति के प्राचीन ग्रंथो में मिलता हैं,


लेकिन दुर्भाग्य हैं की , इसी काल की गति में वो सब नष्ट हो गए किसी आतंकी की सोच के कारण,


फिर भी भारत की उस प्राचीन संस्कृति को श्रुति एवम् स्मृति से पुनः जन जन तक पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण कार्य हुए,


आई के परिपेक्ष में कहे समय बहुत मूल्यवान हैं किंतु पूर्व में इससे अधिक कही महत्वपूर्ण माना गया था,


अगर आप आज से ४० वर्ष पूर्व में जाएं तो आपको मिल जाएगा लोग हर के काम करने से पहले समय यानी काल की चाल वो खगोलीय ग्रहों की स्थिति से अपने जीवन का यापन करते थे।


आज केवल इतना अंतर हैं की सब कुछ आसान हैं ,

परंतु कल नहीं था ओर न ही कल होगा

क्योंकि यह काल हैं अपनी गति से चलता हैं।


और उसकी गति सामान्य नहीं हैं जैसे जो कल शिशु था आज वो वयस्क हैं और जो वयस्क थे आज वृद्ध, वृद्ध प्रकृति में समलित हो गए हैं


काल जीवन में बहुत ही मायने रखता हैं।


तो काल और महाकाल के बीच में मानव हैं और ये सारा संसार।


अंत में यही कहूंगा समय की सीमा हैं पर आपके समय की नहीं, समय के साथ चलते रहिए और हरी भजन में खुद को सौंप दीजिए।

Comments

Popular posts from this blog

इंद्रप्रस्थ

तुमसे जुदा न होंगे हम

वो स्वयं को रचिता समझ बैठी हैं।