यान्ति देवव्रता देवान्‌ पितृन्‌ यान्ति पितृब्रताः।भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपि माम्‌ ॥ (९।२५)

सरला-- आजकल स्त्रियाँ जो अनेक पीर-पैगम्बर, लकड़हा,

चिथड्हा, बाघोबा, मालासी, रिगतिया और मावली आदि अनेक

देवी-देवताओंकी पूजा करती हैं वह सब भी तो इसी देवपूजामें है!


सावित्री--तुम समझी नहीं, देवता तो उनको कहते हैं कि

जिनका शास्त्रोंमें वर्णन है, तुमने जो नाम बतलाये हैं उनमेंसे कोई

भी देवता नहीं है। मुसलमानोंके पीर-पैगम्बरोंको मानना तो

महान्‌ अधर्म और पापकार्य है। हिन्दुओंके इतने देवी-देवताओंके

रहते हिन्दूधर्मका नाश करनेवाले मुसलमानोंके पीर-पैगम्बरोंको

मानना, उनकी पूजा करना, मानना, बोलना, कब्रोंको पूजना,

ताजियोंके नीचेसे निकलना और बालकोंको निकलवाना, छोटे-

छोटे बच्चोंपर मुसलमानोंके मुँहसे थुकवाना, उनकी कब्रोंपर

फूल, पैसे और बतासे चढ़ाना और फिर उनका जूठन प्रसाद मानकर

लेना तो एक प्रकारसे हिन्दूधर्मपर आघात करना है। अतएव

इनकी पूजा तो सर्वथा त्याज्य है, परंतु उन लकड्हा और मालासी

आदिकी पूजा भी धर्मसंगत नहीं । उनकी पूजा भी एक तामसी कार्य

है और प्रेतोपासना है और इस प्रकारकी पूजाका फल क्या होता

है, इसके लिये गीतामें कहे हुए भगवान्‌के वचनोंपर ध्यान दो-


यान्ति देवव्रता देवान्‌ पितृन्‌ यान्ति पितृब्रताः।

भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपि माम्‌ ॥ (९।२५) 


देवताओंको पूजनेवाले देवताओंको प्राप्त होते हैं, पितरोंको

पूजनेवाले पितरोंको प्राप्त होते हैं, भूतोंको पूजनेवाले भूतोंको

प्राप्त होते हैं और मेरे भक्त मुझको ही प्राप्त होते हैं। 

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