महाकुंभ

जब बृहस्पति आकाश में 30 Degree के बारह विभाजनों में से दूसरे भाग में 17 Degree पर पहुँच कर सूर्य के आकाश में 271 Degree के कोण में प्रवेश करके 23.5 Degree के कोण पर झुकी धरती पर अपनी किरणों को दक्षिणी गोलार्ध से उत्तरी गोलार्ध की ओर ले जाना प्रारंभ करता है उस मकर संक्रांति पर्व पर महाकुंभ के प्रथम अमृत स्नान पर हार्दिक शुभकामनाएँ। 


हिन्दू धर्म की महान वैज्ञानिकता के इस पर्व पर गर्व करें व ऋषियों के ज्ञान को नमन करें व धरती को स्थिर व चपटी बताने वालों द्वारा भारतीय संस्कृति को अवैज्ञानिक कहने के चपटे व जड़ प्रभाव से बचें।

This is a great Astronomical Festival no parallel in world celebrated in different regions by different names but true Atma is same.

Comments

Popular posts from this blog

इंद्रप्रस्थ

तुमसे जुदा न होंगे हम

वो स्वयं को रचिता समझ बैठी हैं।