Delhi Metro 10.04.2024

आज मेट्रो में जब मैं ५२ से आगे की मेट्रो के लिए जा रहा था तभी मेट्रो में बैठे दो युवक मुझे देख के हस रहे थे, क्योंकि में अपनी जगह में खड़े होकर अपने इष्ट मन ही मन भज रहा था, 


वो क्यों मेरा उपहास कर रहे थे नही पता , मेरे कद को देख कर, मेरे वस्त्र को देख कर, मेरे माथे पे लगे तिलक को देख कर अथवा किसी अन्य कारण से।


मेने उन्हे घूरते हुए नाराजगी जताने की कोशिश की फिर भी नहीं माने,


मैं उनको मूर्ख कहूं या ये सोचते हुए अपसोस करूं की कुछ नहीं कह सका उनको कोईकी मुसझे अधिद मजबूत दिख रहे थे,


राम जाने , अब तो ये पीड़ा एक समय के बाद ही जाएगी,


काश हमारे शार्प देने की शक्ति आज भी काम करती,

डर ही आनंद लेते समय यह मार्ग दिखाता हैं की ये अनुचित हैं या उचित।


राम मेरी पीड़ा को दूर करें।


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